सोमवार, 16 अप्रैल 2012

दिल अपना बस साज है ............


"खुलकर नील गगन मे बहती एक नयी परवाज़ है.....
 गूंज  रही जो जग भर यू वो एक मेरी आवाज़ है...... 
 तानों पर तेरे बोलों की, देता है जो राग नए....
 ये जो मेरा दिल है अब बस तेरे दिल का साज है......-- नवीन कुमार सोलंकी "

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बहुत धन्यवाद मनीष भाई :))

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  2. पंकज जी बहुत बहुत शुक्रिया.....

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  3. सुन्दर सृजन , बधाई.
    .
    कृपया मेरी नवीनतम पोस्ट पर पधारने का कष्ट करें .

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