रविवार, 24 जुलाई 2011

हम वो कहाँ जो हार मान लें..........................



एक  बार  फिर  हार  गया  मैं ,
पर  मन  मेरा  नहीं  हारा ...
अनुभव  इक  और  मिला  मुझको ,
अब  पा  लूँगा  मैं ये  जग  सारा ...
उम्मीद  टूटती  औरों  की  है ,
हम  तो  बड़े  दिल  वाले  हैं ....
हिम्मत  रख  आगे  बढ़ते  जो ,
हम  तो  वही  मतवाले   हैं  ...


लाखों  अड़चन  आती  पग  में ,
पर  विश्वास  नहीं  डिगता ...
मुझको  दुर्बल  करती  रस्में ,
पर  लक्ष्य  से  ध्यान  नहीं  हटता ...
हम  वो  कहाँ  जो  थककर  रुक  जाएँ ,
हम  शिखा  जीतने  वाले  हैं ...
हिम्मत  रख  आगे  बढ़ते  जो ,
हम  तो  वही  मतवाले  हैं ....


बार  बार  गिरते  हैं  हम  पर  ,
उठना  गिरने  से  ही  सीखा ...
बार  बार  चोटिल  हैं  पर ,
चोट  का  दर्द  नहीं  तीखा ...
हम  वो  कहाँ  जो  हार  मान  लें ,
हम  धरा  चीरने  वाले  हैं  ...
हिम्मत  रख  आगे  बढ़ते  जो ,
हम  तो  वही  मतवाले  हैं........
  
                                         - नवीन  कुमार  सोलंकी  



2 टिप्‍पणियां:

  1. बार बार गिरते हैं हम पर ,
    उठना गिरने से ही सीखा ...
    बार बार चोटिल हैं पर ,
    चोट का दर्द नहीं तीखा ...
    हम वो कहाँ जो हार मान लें ,

    bahut khub bhai, anavarat chalna hi zindagi hai....
    aapka har prayas safal ho... shubhekshaye!

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  2. मनीष भाई बहुत बहुत शुक्रिया । आभारी भी आपके प्रेम व स्नेह के लिए ॥

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